Monthly Archives: May 2015

याद आते हैं वो आँगन, गाँव के चौपाल सारे

याद आते हैं वो आँगन, गाँव के चौपाल सारे बचपन जहाँ हमने गुज़ारा याद हैं वो साल सारे बम्बई हो या लखनऊ शहर, गंगा हो या पतली नहर चेन्नई हो या दिल्ली, याद है भोपाल प्यारे सुन यहाँ कोलाहल कहाँ … Continue reading

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आया कम्पन, धरती काँपी और काँपा सारा संसार

आया कम्पन, धरती काँपी और काँपा सारा संसार ऊँचे-ऊँचे पर्वत हिलते और हिलता जीवन आधार बड़े-बड़े गुम्बज के नीचे हिलते ‘पशुपतिनाथ’ जीवन का संचन था जिनसे खींचे उसने हाथ बिखरा है घर-घर का कोना, बिखरा है बाज़ार आया कम्पन, धरती … Continue reading

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