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सुबह बिक रहा है शाम बिक रहा है

सुबह बिक रहा है शाम बिक रहा है दोस्ती में तू बदनाम दिख रहा है रिश्ता जो कुछ दिन रहा उत्सव-सा निपटने लगा सरेआम दिख रहा है वो तोहफ़े, वे चिट्ठियाँ और वो लिफ़ाफ़े टूटे मकान में दबा सामान दिख … Continue reading

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