Monthly Archives: March 2020

भिखारी और कर्फ़्यू

दो-तीन बार करवटें बदल चुका हूँ। एक बार अपना चार-पाँच इंच पैर भी अटपटे-से कम्बल से बाहर निकाल चुका हूँ। कान पर कुछ पतंगा चल रहा है जिसे फ़िर से हटाया है। शायद ये वही है जो पिछले कुछ घंटों … Continue reading

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दिल्ली दंगे – देखो कैसे आँखों का पानी

देखो कैसे आँखों का पानी चौराहे पर सूख गया कुछ पत्थर बनकर निकला कुछ ख़ुद में बंदूक़ हुआ घर का दीपक कहीं बुझा, माँ बिलखती आँगन में सिसकी रोते-रोते चुप है, सहमी विधवा दामन में तू कैसे कलमा आज पढ़ेगा, … Continue reading

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