मित्र

कुछ पल को मित्र क्या दूर हुआ
लाचार हुआ, बेकार हुआ
नम आँखों से मन को धोया
मन में कई बार विकार हुआ

कोई हमसे यूँ रूठा था
जैसे सपना कोई झूठा था
ना रात नींद से बात हुई
ना सूर्य मुझे स्वीकार हुआ

मैं कीचड़ और तू कमल फ़ूल
आ गले लगा तू सबकुछ भूल
मिलते रस्ते में सस्ते लोग
क्यूँ मिलकर उनसे प्रतिकार हुआ

कितनी बातों को सोचोगे
कितनों के मन को नोचोगे
होने दो जो जिस प्रकार हुआ
क्यू भला बुरा तू सोच रहा
जाने दे जो व्यवहार हुआ

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पिछले सप्ताह High Commission of India, London के कवि सम्मेलन में हिंदी का प्रतिनिधित्व करते हुए 😀 #highcommissionIndia

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Poor hearts

What I have, had with someone
No matter earned or burned
This belongs to someone or thou for now
I am king of poor hearts
And so will conquer others no matter how

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Shackle the plants

Where to go where to march
Need of starch starves me
Very soon will diminish as bunny
And then the time may shackle
the plants to my tummy

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गया था मैं मिलने पिता देवता से

गया था मैं मिलने पिता देवता से
किसी भगवती से, ममता की छँटा से

जब माँ से मिला, मैं माँ में मिला फ़िर
दुआओं का चलता रहा सिलसिला फ़िर

हुआ पिता का भी वंदन चरण वंदना से
है ये पूजा बड़ी, शिव आराधना से

शिवालय है घर,हैं माता-पिता इसके वासी
जिनके चरण में समाया एक मक्का,एक काशी

नज़रें ये गीली-गीली रही
सरोवर कभी नदी-सी बही

छूकर चरण को फ़िर छोड़ आया
फ़िर से पिता को अकेला बनाया

सीखा है मैंने ये बेबस तरीक़ा
सब बेचकर कुछ सपना ख़रीदा…
सब बेचकर कुछ सपना ख़रीदा…

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हिंदी

हर भाषा का ख़ूब महत्व पर हिंदी फूलों के हार-सी
संस्कृत से हैं तत्सम-तद्भव, कुछ अरबी कुछ फारसी

‘चाँद-सा सुंदर चेहरा’ जिसमें उपमा होती है अलंकार
नवमी कक्षा में रट डाला, समास व्याकरण का आधार

क्या भूले तुम कोई मुहावरे जैसे ‘उल्टी गंगा बहना’
‘एक आँख ना भाना’ या ‘उँगली नाच नचाना’

कर्ता ने लिखी कविता ये, और कर्म तुम्हारा पढ़ना
सर्वनाम ‘उसको’ पढ़वाना, ‘वाह’ विशेषण कहना

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विघ्न विनायक गौरी नंदन

विघ्न विनायक गौरी नंदन
करूँ प्रणाम तेरा अभिनन्दन
सब देवो में पहले देवा
करहूँ मैं पूजा, करहूँ मैं सेवा

हे तेरे आशीष को चाहूँ
मन शुधि कर तुझको पाऊं
कर-बद्ध तेरे चरणों में खड़ा
पा तेरी कृपा हो जाऊं बड़ा

सुमुख, गजानन, गणाध्यक्ष
हो महागणपति, सुराध्यक्ष
जय महावीर, मान्य, दविमुख
तुम वीरपति, तुम देव-प्रमुख

शीश नवा, माला ये अर्पण
कर पवित्र, मन-मंदिर दर्पण
ओ मूषक वाहन, लम्बोदर
हो अन्तर्यामी, हे परमेश्वर

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