दिल्ली दंगे – देखो कैसे आँखों का पानी

देखो कैसे आँखों का पानी चौराहे पर सूख गया

कुछ पत्थर बनकर निकला कुछ ख़ुद में बंदूक़ हुआ

घर का दीपक कहीं बुझा, माँ बिलखती आँगन में

सिसकी रोते-रोते चुप है, सहमी विधवा दामन में

तू कैसे कलमा आज पढ़ेगा, कैसे कृष्ण को गाएगा

कैसे तुझमें क़लाम बसेगा, कैसे क़ुरान पढ़ पाएगा

हवा प्रदूषित कहने वाले, दूषित ख़ुद को बना गए

आज रेशमी दिल्ली को इसके ही कीड़े जला गए

हरा रंग है आज लड़ा और भगवा अपने भाई से

सफ़ेद रंग पर लाल खून है, रब से हुई लड़ाई रे

शांति धर्म की एक सीख है, तुम प्यादे नहीं सियासत के

फिर बनों एक ना करो तुम हिंसा, रहो सदा हिफ़ाज़त से

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विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ

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मेरी पुस्तक का विमोचन

🌸🌺मेरी पुस्तक #मेरी_कविता_मेरे_भाव का #विमोचन

Indian High Commission, London द्वारा भारत से बुलाए गए उच्च कोटि के कवि Rajesh Reddy, Sudeep Bhola, Arjun Sisodiya जी, Ashok Charan जी, keerti Mathur जी, Shabnam Ali,

Sonroopa Vishal जी के कर कमलों से मेरी पुस्तक का विमोचन किया गया।

मैं अभिभूत हूँ आपलोगों के स्नेह से, सहृदय धन्यवाद🙏🙏🙏

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पितृदेव, श्राद्ध

बारह मास में एक पक्ष अब ऐसा आया है
पितृदेव को तर्पण का फ़िर अवसर आया है

जिनका हमें आशीष मिला बीते पूरे साल
वे स्वयं यहाँ पधारे हैं करने को ख़ुशहाल
हे अम्मा-बाबा नानी-नाना पुनः तुम्हें सादर नमन
जो भी जल-फ़ूल किया अर्पण, प्रभु करो ग्रहण
श्रद्धा से श्राद्ध करें उनका वही हममें समाया है
पितृदेव को तर्पण का फ़िर अवसर आया है

वे आए हैं मिलने हमसे की कैसा है मेरा परिवार
कैसे बच्चे निभा रहें हैं मिला मुझसे जो संस्कार
और दिखाने सही रूप जीवन का सुमति का
और मिटाने पितृ दोष तथा तथ्य कुमति का
हे पूर्वज है तुम्हें समर्पित जो भी आज बनाया है
पितृदेव को तर्पण का फ़िर अवसर आया है

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हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ

हिंदी मेरी भाषा और हिंदी मेरी हर बात में
जैसे चंदा एक अकेला तारों की बारात में

हिंदी में मैं स्वप्न देखता, हिंदी में करता विचार
हिंदी मेरे मन का दर्पण, हिंदी ही इसका आधार
भारत की सारी भाषाएँ, हैं प्यारी-प्यारी वाणी
नदियाँ हैं सारी भाषाएँ और हिंदी गंगा का पानी
हिंदी में ‘माँ’ लिखना सीखा, राम पढ़ा है साथ में
हिंदी मेरी भाषा है और हिंदी मेरी हर बात में

सुना कबीर ने दोहे गाए अवधी हिंदी पुरवाई में
तुलसी की रामायण पढ़ ली, हिंदी की चौपाई में
हिंदी को कर गया निराला दे सुंदर शब्दों की माला
दिनकर जी की रश्मीरथी और बच्चन की मधुशाला
हिंदी भारत की आरती जैसे संध्या और प्रभात में
हिंदी मेरी भाषा है और हिंदी मेरी हर बात में

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🙏🌺🌸🙏 #शिक्षकदिवस की शुभकामनाएँ, सभी शिक्षकों को प्रणाम 🙏

शिक्षक कई रूप में मिलते हैं, शिक्षक कई प्रारूप में मिलते हैं। उनके पढ़ाने से हम शून्य से मूल्य में परिवर्तित होते हैं। वे अपनी अमुल्य शिक्षा हममें गढ़ते हैं…यूँ ही नहीं हम उन्हें पूज्य कहते हैं।

मात-पिता प्रारम्भिक शिक्षक होते हैं तो विद्यालय आते ही प्राथमिक शिक्षक मिलते हैं।

यद्यपि, हर शिक्षक का पढ़ाने का तरीक़ा भिन्न पाया होगा परंतु उनके शिक्षण को जीवन के अलग-अलग अनुभवों में घुला पाया….भिन्न परिस्थितियों के प्रश्न में खड़ा पाया और हर दशा में उत्तर पाने की दिशा में प्रेरित करता पाया।

कुछ ने साहित्य का वर्ण सिखाया होगा, कुछ ने महान ग्रंथों से अर्जुन और कर्ण को पढ़ाया होगा।

कुछ ने आदर्शों को पिरोया … हाँ राम को सुनाया

कुछ ने गणित का मान बताया, कुछ ने हमें भूगोल, इतिहास से सजाया और कुछ ने विज्ञान का संज्ञान कराया।

आज अवसर है हर छोटी या बड़ी शिक्षा देने वाले गुरुजनों का अभिवादन करने का और उनसे मिली हर उस सीख को प्रणाम करने का जिनसे जीवन का आधार बना।

महान शिक्षक सर्वपल्ली जी को मेरा प्रणाम और मेरे सभी शिक्षकों को साष्टांग दण्डवत 🙏🙏🙏

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मेरा भारत मेरा कश्मीर

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पुस्तक प्रकाशित – मेरी कविता मेरे भाव

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पुस्तक प्रकाशित – मेरी कविता मेरे भाव

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पहली इक्यावन प्रतीयों के पैसे एक NGO ‘उत्साह’ को समर्पित है। कृपया इस लिंक से पढ़ें, पढ़ाएँ और बताएँ अपने अन्य मित्रों को।

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