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देख सुबह से शाम हो गई

देख सुबह से शाम हो गई भागती ज़िंदगी आम हो गई कुछ दूर चला फ़िर रुक गया आराम कर लूँ थोड़ा थक गया सुस्त क़दम और चलने से क्या सूने आसमान में उड़ने से क्या दो पल ही सही बात … Continue reading

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