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मित्र

कुछ पल को मित्र क्या दूर हुआ लाचार हुआ, बेकार हुआ नम आँखों से मन को धोया मन में कई बार विकार हुआ कोई हमसे यूँ रूठा था जैसे सपना कोई झूठा था ना रात नींद से बात हुई ना … Continue reading

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