Tag Archives: हिंदी कविता

आने को तैयार जनवरी

देख दिसम्बर बूढ़ा होकर गिनता अपनी रातें हैआने को तैयार जनवरी चार दिनों की बातें हैकैलेंडर ने चुप्पी साधी अंतिम साल महीने मेंनयी रोशिनी लेकर बैठी जनवरी अपने सीने में उस कोने में साल है बैठा ताके अपनी राहें हैदेख … Continue reading

Posted in जीवन | Tagged , , , | Leave a comment

रावण दहन

आज फिर से रावण जला दिया स्वयं को दोबारा नया बना लिया। अगले बरस तक कुछ और जोड़ लेंगे पुराने बगीचे से कुछ नवीन तोड़ लेंगे स्वयं को तराशना कठिन ही होगा आसान बनाने को दशानन बटोर लेंगे। कम से … Continue reading

Posted in जीवन | Tagged , , , , , , | Leave a comment

हिंदी दिवस

हिंदी को अपनाइए, ना समझें इसको बोझऐसा एक निवेदन है, आग्रह और अनुरोध

Posted in जीवन | Tagged , , , , | 1 Comment

थोड़ी देर रुका जीवन फिर से चलने वाला है

☁️ ⛅️ ☀️ 🌷थोड़ी देर रुका जीवन फिर से चलने वाला हैथोड़ा संयम और सही ये संशय जाने वाला हैदेखा है मैंने गमले में अंकुर नया फूटकर आया अचेतन था दुबका अंदर वह जीवन बन आयाअंदर बैठा अंधकार में साँसों … Continue reading

Posted in जीवन | Tagged , , , | 3 Comments

दिल्ली दंगे – देखो कैसे आँखों का पानी

देखो कैसे आँखों का पानी चौराहे पर सूख गया कुछ पत्थर बनकर निकला कुछ ख़ुद में बंदूक़ हुआ घर का दीपक कहीं बुझा, माँ बिलखती आँगन में सिसकी रोते-रोते चुप है, सहमी विधवा दामन में तू कैसे कलमा आज पढ़ेगा, … Continue reading

Posted in जीवन | Tagged , , , | 2 Comments

विश्व हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ

Posted in जीवन | Tagged , , | Leave a comment

मेरी पुस्तक का विमोचन

🌸🌺मेरी पुस्तक #मेरी_कविता_मेरे_भाव का #विमोचन Indian High Commission, London द्वारा भारत से बुलाए गए उच्च कोटि के कवि Rajesh Reddy, Sudeep Bhola, Arjun Sisodiya जी, Ashok Charan जी, keerti Mathur जी, Shabnam Ali, Sonroopa Vishal जी के कर कमलों से … Continue reading

Posted in जीवन | Tagged , , , , , , | 4 Comments

पितृदेव, श्राद्ध

बारह मास में एक पक्ष अब ऐसा आया है पितृदेव को तर्पण का फ़िर अवसर आया है जिनका हमें आशीष मिला बीते पूरे साल वे स्वयं यहाँ पधारे हैं करने को ख़ुशहाल हे अम्मा-बाबा नानी-नाना पुनः तुम्हें सादर नमन जो … Continue reading

Posted in जीवन | Tagged , , , , , , , , | 4 Comments

हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ

हिंदी मेरी भाषा और हिंदी मेरी हर बात में जैसे चंदा एक अकेला तारों की बारात में हिंदी में मैं स्वप्न देखता, हिंदी में करता विचार हिंदी मेरे मन का दर्पण, हिंदी ही इसका आधार भारत की सारी भाषाएँ, हैं … Continue reading

Posted in जीवन | Tagged , , , , , , | Leave a comment