Tag Archives: Ashish Mishra

मित्र

कुछ पल को मित्र क्या दूर हुआ लाचार हुआ, बेकार हुआ नम आँखों से मन को धोया मन में कई बार विकार हुआ कोई हमसे यूँ रूठा था जैसे सपना कोई झूठा था ना रात नींद से बात हुई ना … Continue reading

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Shackle the plants

Where to go where to march Need of starch starves me Very soon will diminish as bunny And then the time may shackle the plants to my tummy

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गया था मैं मिलने पिता देवता से

गया था मैं मिलने पिता देवता से किसी भगवती से, ममता की छँटा से जब माँ से मिला, मैं माँ में मिला फ़िर दुआओं का चलता रहा सिलसिला फ़िर हुआ पिता का भी वंदन चरण वंदना से है ये पूजा … Continue reading

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हिंदी

हर भाषा का ख़ूब महत्व पर हिंदी फूलों के हार-सी संस्कृत से हैं तत्सम-तद्भव, कुछ अरबी कुछ फारसी ‘चाँद-सा सुंदर चेहरा’ जिसमें उपमा होती है अलंकार नवमी कक्षा में रट डाला, समास व्याकरण का आधार क्या भूले तुम कोई मुहावरे … Continue reading

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विघ्न विनायक गौरी नंदन

विघ्न विनायक गौरी नंदन करूँ प्रणाम तेरा अभिनन्दन सब देवो में पहले देवा करहूँ मैं पूजा, करहूँ मैं सेवा हे तेरे आशीष को चाहूँ मन शुधि कर तुझको पाऊं कर-बद्ध तेरे चरणों में खड़ा पा तेरी कृपा हो जाऊं बड़ा … Continue reading

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आरक्षण

क्यूँ अधिकारों को आधा-आधा बटवाया जाए क्यूँ आवेदन पर जाति आधार लगाया जाए क्यूँ ऊँच-नीच में नौजवान तुलवाया जाए जो ग़रीब धन-दौलत से, क्यूँ ना एक बताया जाए त्रुटिपूर्ण गर हो नीयम, ऐसा कूड़ा फिंकवाया जाए क्यूँ मूल गरीबी समाधान … Continue reading

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देख सुबह से शाम हो गई

देख सुबह से शाम हो गई भागती ज़िंदगी आम हो गई कुछ दूर चला फ़िर रुक गया आराम कर लूँ थोड़ा थक गया सुस्त क़दम और चलने से क्या सूने आसमान में उड़ने से क्या दो पल ही सही बात … Continue reading

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दोस्त को सलाम दोस्ती को सलाम

दोस्त को सलाम दोस्ती को सलाम मस्त लम्हों की मस्ती को सलाम उछलते कूदते रास्तों को सलाम साथ किए चाय नाश्तों को सलाम कभी हँसी, कभी हठी में करी शरारत को सलाम बेवजह दोस्तों से करी बग़ावत को सलाम अल्लढ, … Continue reading

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पत्थरबाज़ी

जिनके रग में है वीर कहानी, हैं जोशीले सैलाबों से चुप चुप खाते जाते पत्थर, पर हैं वो बहते लावों से ओ काशमीर के वासिंदो क्यूँ करते पत्थरबाज़ी तुम नापाक देश से पैसे पाकर करते नमक हरामी तुम थाली में … Continue reading

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