Tag Archives: musafir

ज़िंदगी से बात कर ले

बैठ जा कुछ ज़िंदगी से बात कर ले बात कर के ज़िंदगी को साथ कर ले रात भर लेटा तो था पर सोया नहीं है कल की भागमभाग में खोया कहीं है अपने जो थे वे आज़ नपने लग रहे … Continue reading

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माँ तुम

माँ तुम अलबेली, गंगा-सी पवित्र हो मन की जगमग ज्योति तुम हो, इत्र हो माँ तुम प्यारी, वो लोरी की थाप हो वेदों के मंत्रों की जैसे कोई जाप हो माँ तुम पहेली, सीपों के अंदर मोती हो मैं रोता … Continue reading

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