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पत्थरबाज़ी

जिनके रग में है वीर कहानी, हैं जोशीले सैलाबों से चुप चुप खाते जाते पत्थर, पर हैं वो बहते लावों से ओ काशमीर के वासिंदो क्यूँ करते पत्थरबाज़ी तुम नापाक देश से पैसे पाकर करते नमक हरामी तुम थाली में … Continue reading

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