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बुझे हुए दीपों से पूछो

बुझे हुए दीपों से पूछो कितने रोशनदान बनाए अंधेरे को दूर भगा कर घर में कितने राम सजाए लौ ने कैसे ठुमक-ठुमक कर देखा ख़ुद को जला रही थी आधी बाती बची हुई तिरछी होकर बता रही थी एक बूँद … Continue reading

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रावण दहन

आज फिर से रावण जला दिया स्वयं को दोबारा नया बना लिया। अगले बरस तक कुछ और जोड़ लेंगे पुराने बगीचे से कुछ नवीन तोड़ लेंगे स्वयं को तराशना कठिन ही होगा आसान बनाने को दशानन बटोर लेंगे। कम से … Continue reading

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हिंदी दिवस

हिंदी को अपनाइए, ना समझें इसको बोझऐसा एक निवेदन है, आग्रह और अनुरोध

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पेड़-पौधे

गमले या फिर ज़मीं कहीं पौधों की है जगह वहींकबतक देर लगाओगे और सोचना सही नहीं

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सतरंगी सपनें

सतरंगी सपनों को जैसे पलकों तले बिछाया है और तुम्हारी मुस्कानों ने मुझको नया बनाया है    

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जनतंत्र #TV live

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थोड़ी देर रुका जीवन फिर से चलने वाला है

☁️ ⛅️ ☀️ 🌷थोड़ी देर रुका जीवन फिर से चलने वाला हैथोड़ा संयम और सही ये संशय जाने वाला हैदेखा है मैंने गमले में अंकुर नया फूटकर आया अचेतन था दुबका अंदर वह जीवन बन आयाअंदर बैठा अंधकार में साँसों … Continue reading

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भिखारी और कर्फ़्यू

दो-तीन बार करवटें बदल चुका हूँ। एक बार अपना चार-पाँच इंच पैर भी अटपटे-से कम्बल से बाहर निकाल चुका हूँ। कान पर कुछ पतंगा चल रहा है जिसे फ़िर से हटाया है। शायद ये वही है जो पिछले कुछ घंटों … Continue reading

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दिल्ली दंगे – देखो कैसे आँखों का पानी

देखो कैसे आँखों का पानी चौराहे पर सूख गया कुछ पत्थर बनकर निकला कुछ ख़ुद में बंदूक़ हुआ घर का दीपक कहीं बुझा, माँ बिलखती आँगन में सिसकी रोते-रोते चुप है, सहमी विधवा दामन में तू कैसे कलमा आज पढ़ेगा, … Continue reading

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